तुम्हारी मेरी बात के जाणेगो कोई
है कितनी दफाईं ये पलकां भिगोई
जितना भी तेरी याद का आंसू, मेरे खातिर दिवाली
मैं एक वन का फूल हूँ माधव, तू ही तू इसका माली
दया से तुम्हारी ये, फूला फला है
कलाकार की ये, निराली कला है
मैं गुणगान गाऊँ, उतने ही कम है
मेरी कुछ ना हस्ती, तुम्हें ही शरम है
अणजाणे ही तेरी याद मं, कितनी राताँ खोई
तुम्हारी मेरी बात के जाणेगो कोई
है कितनी दफाईं ये पलकां भिगोई
मुझमें कोई इल्म नहीं है, तेरी प्रीत निभाने का
अक्कल काम नहीं करती है, देख के हाल जमाने का
किधर से किधर, आदमी जा रहा है
नजर ना कोई, रास्ता आ रहा है
दिलाते तुम्हें याद, मैं आ रहा हूँ
इशारे पे तेरे, चले जा रहा हूँ
सर आंख्यां पर हुक्म तिहारो, तू करसी सो होई
तुम्हारी मेरी बात के जाणेगो कोई
है कितनी दफाईं ये पलकां भिगोई
तेरी मेरी प्रीत के मांई, तीजो कोई पंच नहीं
तेरी पूजा अर्चन का है, मन मंदिर सा मंच नहीं
तेरा नाम लेकर, जीये जा रहा हूं
ये बेजोड़ हाला, पिये जा रह हूं
मेरी जिन्दगी तेरी, बांकी अदा है
ये ‘शिव’ तो दीवाना, तुम्हीं पे फिदा है
श्याम बहादुर उड़ता हंसा, देख जगत क्यूँ रोई
तुम्हारी मेरी बात के जाणेगो कोई
है कितनी दफाईं ये पलकां भिगोई
Singer :- Vikash Ruia






