तुम्हारी चाहत में हो के पागल गली गली में भटक रही हूँ (Tumhari Chahat Mein Ho Ke Pagal Gali Gali Main Bhatak Rahi Hoon Lyrics)

radha0001
तुम्हारी चाहत में हो के पागल गली गली में भटक रही हूँ | Tumhari Chahat Mein Ho Ke Pagal Gali Gali Main Bhatak Rahi Hoon Lyrics

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,
कहा मिलोगे तुम मुझको मोहन ,
हर एक जगह पे ढूंढ रही हूँ ,

पता बता दो तो मिलने आऊ ,
हाल ये दिल का तुम्हे सुनाऊ ,
ना बढ़ाओ मुझसे यूं दुरी मोहन ,
हाथ जोड़कर ये कह रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,

क्या मैं करू जो तुम मान जाओ ,
पास में अपने मुझे बुलाओ ,
कोई तो राह बता दो मोहन ,
हाथ जोड़कर में पूछ रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,

क्या कुछ तुमसे छुपा हैं मोहन ,
तेरे भरोसे हैं मेरा जीवन ,
जनम जनम से हूँ मैं तो प्यासी ,
जनम जनम से हूँ तेरी दासी ,
दरश को तेरे तरस रही हूँ ,

तुम्हारी चाहत में हो के पागल ,
गली गली मैं भटक रही हूँ ,

Bhajan Lyrics – Jay Prakash Verma, Indore

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

three × 1 =

Scroll to Top